बिलासपुर

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बिलासपुर की अन्य जानकारी

चेक पोस्‍ट

कृषि उत्‍पाद मंडी समिति बिलासपुर की फिलहाल दो चेक पोस्‍ट हैं, पहली स्‍वारघाट में और दूसरी गम्‍भर साई में। चेक पोस्‍ट की स्‍थापना एपीएमसी बिलासपुर के अधिसूचित क्षेत्र में अधिसूचित कृषि उत्‍पादों की आवक और रवानगी का रिकॉर्ड रखने और कम्‍पाऊंड शुल्‍क वसूलने के लिए की गई है।   

संपर्क

संपर्क

सचिव एपीएमसी बिलासपुर, एपीएमसी कार्यालय,

प्रमुख मंडी स्‍थल, बस स्‍टैंड के नजदीक,

बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश)

पिन कोड : 174001

फोन : +911978-221282

ईमेल: [email protected]

आरटीआई के तहत एपीआईओ का नाम और पता

सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत कृषि उत्‍पाद मंडी का सचिव एपीआईओ है।

सुशील गुलेरिया

सचिव, एपीएमसी बिलासपुर

एपीएमसी बिलासपुर कार्यालय, प्रमुख मार्केट स्‍थल, बस स्‍टैंड के नजदीक, बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश)

बिलासपुर के बारे में

बिलासपुर जिला पहले ब्रिटिश भारत की रियासत खलूर के नाम से जाना जाता था। शासक ने 12 अक्‍तूबर, 1948 को भारत सरकार का अधिपत्‍य स्‍वीकार कर लिया और एक मुख्‍य आयुक्‍त के तहत बिलासपुर को भारतीय राज्‍य बना दिया गया। 1 जुलाई, 1954 को बिलासपुर स्‍टेट का हिमाचल प्रदेश में विलय कर दिया गया और यह बिलासपुर जिला बना। बिलासपुर उत्‍तर में मंडी; पश्‍चिम में हमीरपुर और दक्षिण पूर्व में सोलन एवं शिमला जिलों से घिरा है। बिलासपुर जिले का मुख्‍य शहर गोविंद सागर झील के किनारे पर स्‍थित है।

बिलासपुर एपीएमसी

एपीएमसी बिलासपुर का गठन मई, 1979 में हिमाचल प्रदेश कृषि उत्‍पाद मंडी अधिनियम, 1969 (1970 की अधिनियम संख्‍या 9) के तहत किया गया था, जो कि अब हिमाचल प्रदेश कृषि एवं बागवानी उत्‍पाद विपणन (विकास एवं नियमन) अधिनियम, 2005 (2005 की अधिनियम संख्‍या 20), की धारा 86 से निरसित हो चुका है। कृषि उत्‍पादों के बेहतर नियमन और जिले के उत्‍पादकों को बेहतर विपणन सुविधा और सूचनाएं उपलब्‍ध करवाने के लिए राज्‍यपाल ने 25 मई, 2005 को इसे मंजूरी दी थी। अधिसूचना संख्‍या HMB-3/72 (ii) DT.

जयराम ठाकुर

मुख्यमंत्री ने किसानो को कहा कि किसानो को एक फसल और फलो पर निर्भर नही रहना चाहिए, परन्तु उन्हें मौसमी सब्जिया, फल और अन्य फसलो की विविधीकरण की ओर जाना चाहिए. उन्होंने कहा की हिमाचल प्रदेश की जलवायु और स्थलाकीर्ति विविध है, और हमारे किसानो को सिखाया जाना चाहिए की उन्हें इसका लाभ उठाना चाहिए.क्यूंकि जो सब्जिया मैदानी इलाके में सर्दियों में उगायी जाती है उन्हें यहा गर्मियों में उगाया जा सकता है.

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