एपीएमसी बिलासपुर का गठन मई, 1979 में हिमाचल प्रदेश कृषि उत्पाद मंडी अधिनियम, 1969 (1970 की अधिनियम संख्या 9) के तहत किया गया था, जो कि अब हिमाचल प्रदेश कृषि एवं बागवानी उत्पाद विपणन (विकास एवं नियमन) अधिनियम, 2005 (2005 की अधिनियम संख्या 20), की धारा 86 से निरसित हो चुका है। कृषि उत्पादों के बेहतर नियमन और जिले के उत्पादकों को बेहतर विपणन सुविधा और सूचनाएं उपलब्ध करवाने के लिए राज्यपाल ने 25 मई, 2005 को इसे मंजूरी दी थी। अधिसूचना संख्या HMB-3/72 (ii) DT. 24 July 1973 (एचएमबी-3/72 (ii) दिनांक 24 जुलाई 1973) के जरिये संपूर्ण बिलासपुर जिले को मंडी समिति के ऑपरेशन के क्षेत्र के रूप में अधिसूचित किया गया था।
अपने शुरुआती दिनों में समिति ने सिर्फ दो डीलरों के साथ काम शुरू किया था, जिनकी संख्या 2012 तक बढ़कर 203 तक पहुंच चुकी है। शुरुआती दौर में मंडी समिति की आमदनी भी हजारों में ही थी, जो कि बढ़कर वर्ष 2012-13 में 97 लाख रुपए तक पहुंच गई। अब कृषि उत्पाद मंडी समिति अपने कार्यालयी और विकासात्मक खर्चे अपनी आमदनी से ही पूरा कर रही है।
प्रमुख मंडी, बिलासपुर की स्थापना के लिए बिलासपुर स्थित सरकारी भूमि का 1196 वर्ग मीटर क्षेत्र कृषि विभाग के नाम स्थानांतरित कर दिया गया था। 2 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित मंडी स्थल और इमारत का निर्माण कार्य वर्ष 2002 में पूरा हुआ था। फलों और सब्जियों के थोक विक्रेता 20 दिसंबर, 2002 को बिलासपुर मंडी से यहां स्थानांतरित किए गए थे।
इस इमारत में 25 दुकानें हैं, जिनमें से 10 दुकानें भूतल पर, 10 प्रथम तल पर और 5 दुकानें दूसरे तल पर शयनकक्ष के साथ-साथ हैं। किसान विश्राम गृह और एपीएमसी का कार्यालय तीसरे तल पर स्थित हैं। चौथे तल पर 20 छोटे बूथ हैं। यह तल रोजमर्रा की जरूरत के सामान के लिए शॉपिंग कॉम्पलैक्स की तरह काम कर रहा है।
नम्होल में निर्मित उप मंडी स्थल ने भी वर्ष 2001 से काम करना शुरू कर दिया है। घुमारवीं में एक और उप मंडी स्थल का निर्माण कार्य जारी है, जो 3-4 महीने के अंदर-अंदर पूरा होने की उम्मीद है।
