मंडी के बारे में

एपीएमसी मंडी की स्‍थापना वर्ष 1984 में हिमाचल प्रदेश कृषि उत्‍पाद मंडी अधिनयम, 1969 के तहत की गई थी। उक्‍त अधिनियम अब हिमाचल प्रदेश कृषि एवं बागवानी उत्‍पाद विपणन (विकास एवं नियमन) अधिनयम, 2005 से निरसित हो चुका है। इस नए कानून का उद्देश्‍य हिमाचल प्रदेश राज्‍य में कृषि उत्‍पादों का विपणन सुधारना, कुशल विपणन प्रणाली का विकास, कृषि-प्रसंस्‍करण और कृषि निर्यात को प्रोत्‍साहन देना, कृषि उत्‍पादों के लिए मंडियों के उपयुक्‍त प्रशासन की स्‍थापना करना था। साथ ही इसका उद्देश्‍य हिमाचल प्रदेश राज्‍य में न्‍यूनतम मानक सुविधाओं के साथ प्रतियोगी बाजारों को कार्यक्षेत्र उपलब्‍ध करवाकर और प्रक्रियाएं एवं प्रणाली सुनिश्‍चित करके कृषि उत्‍पादों के विपणन के लिए अच्‍छी तरह प्रशासित और कुशल ढांचागत सुविधाएं सुनिश्‍चित करना भी है।

25-2-1981 से एपीएमसी, मंडी के संचालन क्षेत्र के रूप में पूरा जिला अधिसूचित किया जा चुका है। एपीएमसी, मंडी ने खाद्यान्‍न, फल एवं सब्‍जियों, लकड़ी, कुक्‍कुट एवं पशुपालन और इसके उत्‍पादों इत्‍यादि के लिए अधिनियम के प्रावधानों के तहत 481 व्‍यापारी पंजीकृत किए हैं। समिति में 16 सदस्‍य शामिल हैं, जिनमें से 6 पदेन सदस्‍य हैं, जबकि 10 गैर सरकारी सदस्‍य हैं।